कठिन ट्रेनिंग के बाद बनते हैं ब्लैक कैट कमांडो..पलभर में दुश्मन को ढेर करने की मिलती है ट्रेनिंग

New Delhi : देश में आ’तंकवाद से लड़ने के लिए ब्लैक कैट कमांडोज को तैयार किया जाता है। ब्लैक कैट कमांडो बनना इतना आसान भी नहीं होता। इसके लिए खास ट्रेनिंग मिलती है। आज हम आपको NSG में ब्लैक कैट कमांडोज बनाने का प्रोसेस बता रहे हैं।

1984 में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड, एनएसजी (NSG) को बनाया गया था। यहां देश में आ’तंकवाद से निपटने के लिए कमांडो तैयार किए जाते हैं। इनकी ट्रेंनिग बहुत ही कठिन होती है जिसका मकसद यह होता है कि अधिक से अधिक योग्य लोगों का चयन हो सके। ठीक उसी तरह से कमांडोज फोर्स के लिए भी कई चरणों में चुनाव होता है।

90 दिनों की कठिन ट्रेनिंग के पहले भी 1 हफ्ते की ऐसी ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें 15-20 प्रतिशत तो सैनिक अंतिम दौड़ तक पहुंचने में रह जाते हैं। इस दौरान कमाडों को आग के गोल और गोलियों की बौछारों के बीच ट्रेनिंग दी जाती है।

इस राउंड के बाद जो सैनिक बचते हैं और अगर उन्होंने 90 दिन की ट्रेनिंग कुशलता से पूरी कर ली तो फिर वो देश के सबसे ताकतवर कमांडो फोर्स में शामिल होने के लायक बन जाते हैं। 90 दिन की ट्रेनिंग के बाद भी ये कमांडो सबसे आखिर में साइकोलोजिकल टेस्ट से गुजरते हैं जिसे पास करना अनिवार्य है। एनएसजी अब ये विचार कर रहा है कि एसपीजी की तर्ज पर एनएसजी के कमांडो का मनोवैज्ञानिक टेस्ट हो। अभी एनएसजी DRDO के तहत तैयार किये गए मनोवैज्ञानिक टेस्ट के जरिये हर तीन महीने में ट्रेनिंग से पास होने वाले 700 से 1000 कमांडो को गुजारता है। लेकिन देश के प्रधानमंत्री और दूसरे VVIP की सुरक्षा करने वाले एसपीजी कमांडो VIENNA TEST SYSTEM के जरिये कंप्यूटराइज्ड मनोवैज्ञानिक टेस्ट से गुजरते हैं। इसके जरिए ज्यादा स्टीक नतीजे आने की उम्मीद रहती है।

NSG में 53 प्रतिशत कमांडो सेना से आते हैं जबकि 47 प्रतिशत कमांडो 4 पैरामिलिट्री फोर्सेज- सीआरपीएफ, आईटीबीपी, आरएएफ और बीएसएफ से आते हैं। इन कमांडोज की अधिकतम कार्य सेवा पांच साल तक होती है। एनएसजी कमांडो तो हथियार और बिना हथियार दोनों के साथ ट्रेनिंग दी जाती है। एनएसजी कमांडो को ब्लैक कैट कहा जाता है क्योंकि वह हमेशा काले नकाब, काले कपड़े में नजर आते हैं। उनके सिर से लेकर पैर तक कपड़ों का रंग काली ही होता है।

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