दुश्मनों को चकनाचूर करेगी भारत की ये ताकत,देश की तरफ आंख उठाने वाले दुश्मनों का होगा काम तमाम

New Delhi:  चिनूक के भारतीय एयरफोर्स के बेडे में शामिल होने से न केवल सेना की क्षमता बढ़ेगी बल्कि कठिन रास्ते और बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रचर प्रोजेक्ट को बनाने में भी इसका अहम योगदान रह सकता है। यह हेलिकॉप्टर 9.6 टन तक कार्गो ले जा सकता है। इसमें भारी मशीनरी, आर्चिकली बंदू’कें और हाई अल्टीट्यूड वाले लाइट आर्मर्ड वीकल्स शामिल है। सबसे पहले चिनूक हेलिकॉप्टर को 1962 में उड़ाया गया था और तब से अब तक इसकी मशीन में बड़े अपग्रेड हो चुके हैं।

अगस्त 2017 में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंक से 4168 करोड़ रुपए की लागत से 6 अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर अन्य ह’थियार प्रणाली खरीदने के लिए मंजूरी प्रदान की थी।  भारत के पास सबसे बड़ी ताकत आ गई है। अब दुश्मनों को भारत की तरफ नजर उठाकर देखने के लिए 100 बार सोचना होगा। भारत को इस बार जो शक्ति मिली है उससे  अमेरिका ने  PAK में घुसकर  लादेन का खा’त्मा किया था। भारतीय वायुसेना अभी तक काफी हद तक रूसी Mi-17 जैसे मिडियम श्रेणी के लिफ्ट हेलिकॉप्टरों पर डिपेंड थी, लेकिन चिनूक के आने से मजबूती मिलेगी। इस हेलिकॉप्टर में एक बार में गो’ला बा’रूद, ह’थियार के अलावा 300 सैनिक भी जा सकते हैं।

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चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना की खास ताकत है। इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मा’रा था। वियतनाम से लेकर इराक के यु’द्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है। भारत जिस चिनूक को खरीद रहा है, उसका नाम है सीएच-47 एफ है। यह 9.6 टन वजन उठा सकता है, जिससे भारी म’शीनरी, तो’प और ब’ख्तरबंद गा’ड़ियां लाने-ले जाने में सक्षम है।

अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोईंग ने भारतीय वायुसेना के लिए 4 चिनूक सैन्य हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति गुजरात में मुंद्रा बंदरगाह पर की है। इन हेलिकॉप्टरों के वायुसेना में शामिल होने के बाद देश की सुरक्षा प्रणाली को मजबूती मिली है। अभी कुछ समय पहले ही इन हेलिकॉप्टरों के इस्तेमाल के लिए वायुसेना को ट्रेनिंग भी दी गई थी।  हेवीलिफ्ट चिनूक पुराने पड़ चुके MI 26 की जगह लेंगे। वायुसेना के चार पायलट और चार इंजीनियर अमेरिका के डिलेवर में चिनूक हेलीकॉप्टर को चलाने की ट्रेनिंग कर चुके हैं।

इसका इस्तेमाल मानवीय और आपदा राहत अभियानों में भी किया जाता है। राहत सामग्री पहुंचाने तथा बड़ी संख्या में लोगों को बचाने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। सीएच-47 एफ (आई) चिनूक एक  मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय सशस्त्र बलों को मजबूत करेगा। भारतीय वायुसेना ने वर्तमान में 15 चिनूक हेलिकॉप्टर का ऑर्डर दे रखा है।’

भारत ने बोईंग के साथ 22 अपाचे हेलिकॉप्टर और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया को सितम्बर 2015 में अंतिम रूप दिया था। लड़ाकू और मानवीय मिशनों के पूरे स्पेक्ट्रम में बेजोड़ सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता प्रदान करने वाले इस हेलीकॉप्टर से सेना की दुश्मन तक पहुंच आसान हो जाएगी।

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