दो दोस्तों ने तैयार की सस्ती इलेक्ट्रॉनिक बैटरी, केवल 15 मिनट में हो जाती है फुल चार्ज

New Delhi:  जुबीन और अमेय ने 2014 में मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही गीगाडाइन के कॉन्सेप्ट पर काम शुरू कर दिया था। दोनों को टेस्ला के मॉडल एक कारों के लॉन्च के बाद इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली थी।  जुबीन को कारों का शौक था और अमेय को तकनीक का, इसलिए दोनों ने अपने शौक को ही अपना करियर बनाने का फैसला लिया था। दोनों ने इस काम के लिए अपनी-अपनी योग्यता का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने एनएमआईएमएस में अपने आखिरी साल के प्रोजेक्ट के तौर पर एक ईवी मॉडल तैयार करने का फैसला लिया।

ईंधन के बढ़ते दामों और पेट्रोल-डीजल के चलते पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान की वजह से,  बेहतर और ईको-फ़्रेंडली मोबिलिटी सल्यूशन्स वक्त की जरूरत बन चुके हैं। पिछले कुछ सालों से देश-विदेश में हर जगह इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का जिक्र हो रहा है और अब धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के आधुनिक डिजाइन्स सामने आ रहे हैं।  भारतीय स्टार्टअप भी इससे पीछे नहीं हैं। मुंबई का स्टार्टअप, गीगाडाइन एनर्जी भी इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स में से एक है, जिसने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बैटरी के लिए एक खास तकनीक विकसित की है।

स्टार्टअप की योजना है कि 2020 की शुरुआत तक कमर्शल ऑपरेशन्स की शुरुआत की जाए। स्टार्टअप ने जो प्रोटोटाइप तैयार किया है, उसकी क्षमता 1 किलोवॉट आवर  तक है। जुबीन वर्गीज और अमेय गाडीवान ने मिलकर गीगाडाइन एनर्जी की शुरुआत की थी। नीति आयोग के इलेक्ट्रिक व्हीकल मिशन 2030 के मुताबिक, भारत में 2030 तक ईवी बैटरीज का घरेलू मार्केट 300 बिलियन डॉलर्स तक पहुंच सकता है। गीगाडाइन नीति आयोग की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है।

अपने प्रोजेक्ट के दौरान वे मुंबई के कबाड़ी बाजारों के चक्कर लगा रहे थे और इस दौरान ही उन्हें पता चला कि ईवी को पावर देने के लिए जिस बैटरी की ज़रूरत है, वह पूरी गाड़ी तैयार करने की लागत से तीन गुना ज्यादा कीमत की है। इसके बाद ही, जुबीन और अमेय ने कॉलेज छोड़ दिया और 2015 में गीगाडाइन एनर्जी की शुरुआत की।

स्टार्टअप का दावा है कि उनकी तकनीक की मदद से ईवी बैटरीज को केवल 15 मिनट में ही पूरी तरह से चार्ज किया जा सकता है। यह तकनीक बैटरीज को सस्ता, हल्का और ईको-फ़्रेडली बनाती है। इतना ही नहीं, कंपनी का यह भी दावा है कि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली लीथियम-आयन बैटरीज की अपेक्षा उनकी तकनीक से तैयार होने वाली बैटरीज की लाइफ 50 गुना तक ज्यादा है।

 

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