केंद्रीय मंत्री के बेटे को हराकर चपरासी का बेटा बना विधायक, 5 हजार वोट से मिली सबसे बड़ी जीत

New Delhi: एक केंद्रीय मंत्री के विधायक के बेटे को चुनाव में पटखनी देकर चपरासी के बेटे ने विधायक पद हासिल कर लिया। चपरासी के बेटे मनोज चावला हजारों मतों से जीत जाना यह साबित करता है कि लोकतंत्र न्याय करने उतरता है तो बड़े-बड़े दिग्गज औंधेमुंह गिर पड़ते हैं। चपरासी के बेटे ने ये जीत हासिल कर साबिक कर दिया है कि मतदाता ही सबसे बड़ा न्यायधीश होता है, मतदाता के आगे सत्ताबल की नहीं चलती है।

दरअसल, भाजपा इसलिए भी भ्रम में जी रही थी कि प्रतिद्वंद्वी मनोज चावला की वैसे भी मामूली पारिवारिक हैसियत है। वह एक चपरासी के बेटे हैं। मतदाताओं पर तो भाजपा का ही दबदबा रहेगा। इस गलतफहमी को लोकतंत्र ने डंके की चोट पर ठिकाने लगा दिया। चुनाव नतीजा आने के बाद बड़े-बड़े चुनाव विशेषज्ञ भी वोटरों की ईमानदारी पर हक्के-बक्के रह गए। जिसकी जीत की उम्मीद किसी को नहीं थी उस सीट से चपरासी का बेटा मंत्री के बेटे को हराकर जीत दर्ज की और दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।

रतलाम की आलोट विधानसभा सीट पर जीते मनोज चावला की कामयाबी की दास्तान ही कुछ अलग है। नवनिर्वाचित विधायक मनोज के पिता रतलाम कलेक्ट्रेट में चपरासी की नौकरी करते हैं। 35 साल के मनोज ग्रेजुएट हैं। चुनाव मैदान में उनके सामने कोई मामूली प्रत्याशी नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत के विधायक बेटे जीतेंद्र गहलोत थे। इसके बावदूज मनोज ने जबरदस्त जीत हासिल की।

हैरानी की बात तो ये है कि मनोज चावला के लिए कोई भी बड़ा नेता प्रचार करने के लिए राजी नहीं था। वहीं दूसरी तरफ जीतेंद्र गहलौत को जिताने के लिए उनके मंत्री पिता पूरे वक्त खुद तो निर्वाचन क्षेत्र में नतीजा आने तक 24 घंटे डटे हुए थे, लेकिन लास्ट में हार हाथ आई। उनके चुनाव प्रचार में केंद्रीय गृहमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसी कद्दावर शख्सियतों की जनसभाएं हुईं। जब मतगणना हुई तो कांग्रेस प्रत्याशी मनोज चावला ने भाजपा के विधायक प्रत्याशी जीतेंद्र गहलौत को 5 हजार वोट से हरा दिया।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *