जब भी भलाई करने का मौका मिले तो पीछे नहीं हटना चाहिए, छोटा सा भलाई का काम बड़ा फल दे सकता है

New Delhi:  कहते हैं कलियुग में भलाई का जमाना नहीं होता लेकिन भलाई करने से हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। भलाई करने वाले को एक ना एक दिन उसका फल जरूर मिलता है। आज ना तो कल आपको आपके अच्छे काम का इनाम जरूर मिलेगा। इसी को लेकर एक प्रचलित लोककथा हम आपके लिए लेकर आए हैं।

लोक कथा के अनुसार किसी नदी के किनारे पर एक सेठ रहता था। उसके पास एक नाव भी थी। एक बार सेठ ने सोचा कि उसकी नाव बहुत पुरानी हो गई है, इस पर पेंट करवा लेना चाहिए। ये सोचकर सेठ ने नाव एक पेंटर को दे दी और उस पर नया रंग करने लिए कहा।

उसी दिन शाम तक पेंटर ने नाव पर रंग कर दिया और अपने घर को चला गया। उससे अगले दिन सेठ पेंटर के घर पहुंचा और उसे बहुत सारा पैसा दे दिया। पेंटर हैरान हो गया, उसने कहा कि सेठजी ये तो मेरे काम के हिसाब से बहुत सारा पैसा है। मैं इतना पैसा कतई नहीं ले सकता।

तब सेठ ने पेंटर से कहा कि भाई मेरी नाव में एक छोटा सा छेद भी था। जब मैंने तुम्हें नाव पेंट करने के लिए दी थी, तब ये बताना भूल गया था। मैं तुम्हें नाव देकर नगर से बाहर से गया था। जब शाम को घर वापस आया तो मालूम हुआ कि बच्चे नाव लेकर नदी में सैर करने गए हैं। ये सुनते ही मेरी हालत खराब हो गई, क्योंकि मुझे मालूम था कि नाव में एक छेद भी है, बच्चे नाव ले गए हैं, उस छेद की वजह से नाव डूब सकती है।

मैं तुरंत ही दौड़ता हुआ नदी किनारे पहुंचा, वह मेरे बच्चे सकुशल नदी की सैर करके लौट आए थे। मैंने नाव में वो छेद देखा तो दिखाई नहीं दिया। मैं समझ गया कि तुमने पेंट करते समय वह छेद बंद कर दिया है। अगर तुमने वह छेद बंद नहीं किया होता तो मेरे बच्चों के प्राण संकट में फंस सकते थे। इसीलिए मैं तुम्हें इतना पैसा दे रहा हूं।

पेंटर ने कहा कि सेठजी वह तो छोटा सा काम था, वह भी मेरे काम का ही हिस्सा था। इसीलिए मैंने वह छेद बंद कर दिया था, उसके लिए मुझे कोई अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ी थी।

कथा की सीख : इस कथा की सीख यह है कि हमें जब भी किसी भलाई करने का मौका मिले तो पीछे नहीं हटना चाहिए। भलाई चाहे छोटी सी हो, लेकिन अवसर मिले तो मदद जरूर करें। कभी-कभी छोटी सी भलाई का भगवान बहुत बड़ा फल दे देते हैं। हमारा छोटा सा काम किसी के लिए अनमोल हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *