लड़कियों की सुरक्षा के लिए खोला पैडबैंक, अब फ्री में सैनिटरी पैड दे रहा यूपी का पैडमैन

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New Delhi: बरेली में रहने वाले 26 साल के चित्रांश सक्सेना ने पैडबैंक खोलने का काम किया है। समाज की पिछड़ी और गरीब महिलाओं को मुफ्त में सैनिटरी पैड्स देकर चित्रांश ने जो काम किया है वह वाकई में काबिलेतारीफ है।  इस ग्रुप में लगभग 15 लोग हैं जिसमें स्टूडेंट्स से लेकर नौकरी करने वाले लोग भी शामिल हैं। चित्रांश का कहना है कि मैं हमेशा से लोगों की भलाई के लिए कुछ करना चाहता था। मैं चाहता था कि इस समाज को कुछ दूं। पैडमैन फिल्म देखने के बाद लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए। अरुणाचलम मुरुगनाथम की कहानी ने मुझे काफी प्रभावित किया और मुझे लगा कि समाज में पीरियड्स से जुड़ी नेगेटिव बातों को दूर करना चाहिए। 

चित्रांश ने बताया कि- उनके इस काम को देखकर लोग पैसे भी दान करते हैं जिनकी मदद से सैनिटरी पैड्स खरीदे जाते हैं। अपनी पहल को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही उनके परिवार और दोस्तों का भी उन्हें पूरा साथ मिलता है।  पैडबैंक की टीम में एना खान, शिल्पी सक्सेना, ऐश्वर्या लाल, जेनिफर और सहर चौधरी शामिल हैं। ये सारे दोस्त अपनी पॉकेट मनी से बचे पैसों का इस्तेमाल पैड्स खरीदने में करते हैं।

लड़कियों को एक पासबुक दी जाती है। इस पासबुक के जरिए लड़कियां मुफ्त में सैनिटरी पैड्स पा सकती हैं। हर महीने आठ सैनिटरी पैड्स पहुंचाए जजाते हैं। अभी तक 148 लड़कियों को इस पैडबैंक से जोड़ा जा चुका है। गांव में अधिकतर महिलाएं सैनिटरी पैड्स की जगह गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उन्हें गंभीर बीमारी फैलने का खतरा रहता है। लेकिन हमारी पहल से काफी जागरूकता आई है और अब वे सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करने लगी हैं। चित्रांश कहते हैं कि जब उन्होंने इस काम को शुरू किया था तो लोगो उन पर हंसते थे, लेकिन अब वही लोग उनके ग्रुप का हिस्सा बनना चाहते हैं, यही उनकी सफलता है।

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