सरबजीत सिंह…कहानी उस लड़के की जिसे सारा हिंदुस्तान जानता है,एक गलती ने पलट दी थी पूरी जिंदगी

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New Delhi: ये कहानी है पंजाब के उस नौजवान की…. जिसकी एक छोटी सी गलती ने पूरी जिंदगी पलटकर रख दी। पंजाब का नौजवान तरनतारन के एक गांव का रहने वाला साधारण परिवार के इस लड़के की दर्दभरी कहानी जानकर देश का हर एक शख्स रो पड़ता है। कहानी है सरबजीत सिंह की।

सरबजीत सिंह की असल में जिंदगी बेहद दर्दनाक रही। उनके परिवार पर जो बीती वो बस वही समझ सकते हैं। सरबजीत की कहानी पर फिल्म भी बनी है। फिल्म में रणदीप हुड्डा ने सरबजीत का किरदार निभाया है और ऐश्वर्या ने सरबजीत की बहन दलबीर कौर का। फिल्म में तो ऐश ने सरबजीत की बहन दलबीर कौर का किरदान निभाया है लेकिन असल जिंदगी में दलबीर कौर ने अपने भाई को बचाने के लिए जिस हद तक कोशिश गृह मंत्रालय से लेकर विदेश मंत्रालय तक कर सकती थी उन्होंने की।

एक गलती- तरनातारन के भीखीविंद गांव से पाकिस्तान बॉर्डर ज्यादा दूर नहीं था। 90 के समय बॉर्डर पर फेंसिंग और तार नहीं लगे होते थे। सरबजीत सिंह न’शे में गलती से भारत का बॉर्डर लांघकर पाकिस्तान पहुंच गए। और फिर.. वही हुआ जो नहीं होना था। सरबजीत सिंह के गांव भीखीविंद से पाकिस्तान का बॉर्ड महज 13 किमी दूर है और उस समय कई बार भारत और पाकिस्तान के नागरिक भूले भटके सीमा पार कर जाते थे और कई बार उन्हें उसी समय छोड़ भी दिया जाता था। लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ। सीमा पर तैनात एक कर्नल ने सरबजीत सिंह को रॉ एजेंट मानकर केस चलाया। सरबजीत सिंह के मामले में कई फर्जीवाड़े भी किए गए जैसे उनके पासपोर्ट पर उनका नाम खुशी मोहम्मद था और तस्वीर उनकी ही थी और पाक उन्हें मंजीत सिंह कहता था जो असल में धमा’कों का आरोपी था।

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काफी समय तक पाक मीडिया भी उन्हें मंजीत सिंह कहती थी। असल मंजीत सिंह उस समय भारत-पाकिस्तान नहीं बल्कि तीसरे देश में था। इधर 2005 में वीडियो जारी किया गया जिसमें ये कहा गया कि सरबजीत सिंह ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, लेकिन बाद में पता चला कि दबाब डालकर उनसे जुर्म कबुल करवाया गया था। जेल के अंदर से सरबजीत अपने परिवार को चिट्ठी लिखा करते थे। वह चिट्ठी के जरिए अपना दर्द बयां करते थे। अपने वकील को लिखे एक चिट्ठी में सरबजीत ने अपना दर्द लिखा कि उन्हें जेल में बुरी तरह प्रता’ड़ित किया जाता है। सभी उन्हें शक की निगाहों से देखते हैं और पाकिस्तान पुलिस भी उनके साथ जेल में बहुत ही अमानवीय सलूक करती है। एक बार तो उन्हें एक जगह कैद कर लिया गया था और अंदर चूहे छोड़ दिए गए थे। इतना ही नहीं पाक ने सरबजीत के साथ जो किया उसे जानकर वाकई सिहरन पैदा हो जाती है। ले

जेल में प्र’ताड़ित करने के बाद साल 2008 में आखिरकार फां’सी की तारीख तय की गई। बहन ने अपने भाई को वतन वापस लाने के लिए अपनी सारी जिंदगी दाव पर लगा दी थी। सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने भाई वापस लाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया। वो भरोसा में नहीं एक्सन में विश्वास करती थी। 1990 में जब नरसिम्हा राव ने उनसे फोन पर बात की तो वो तभी फोन रखी जब पीएम उनसे सीधे मिलने के लिए राजी हुए। 23 सालों में वो खुद पर्सनली 170 से भी ज्यादा भारत-पाक के नेताओं से मिलीं।

दलबीर कौर ने अपने दम पर इतने दमदार तरीके से सरकार तक बात पहुंचाई की 2008 में सरबजीत सिंह की फां’सी तक रोकनी पड़ी। मनमोहन सिंह ने खुद मामले में हस्तक्षेप किया। दलबीर कौर के बारे में संसद में भी कहा गया कि वो पंजाबी शेरनी हैं। तो वहीं, उनके जज्बे की तारीफ पाकिस्तान तक में की गई। साल 2012 में यह खबरें भी आई थी की सरबजीत सिंह को रिहा किया जाएगा लेकिन बाद में पता चला कि पाकिस्तान सरकार सरबजीत सिंह नहीं सुरजीत सिंह को रिहा कर रही है।

इस खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया था। 26 अप्रैल 2013 को सरबजीत सिंह पर जेल में कुछ कै’दियों ने लोहे की रॉ’ड,ईं’ट, स’लाखों से हम’ला किया जिसके बाद उन्हें जेल ले जाया गया और उनकी मौ’त हो गई। और 23 साल बाद सरबजीत की वतन वापसी हुई, लेकिन तिरंगे में लिपटकर। सरबजीत ने अपनी बहन से एक बार कहा था- एक दिन दुनिया तुझे मेरे नाम से पहचानेगी और वही हुआ। दलबीर कौर में भाई सरबजीत को वापस लाने का जो जज्बा था वो गजब का था।

 

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