गणेश कामथ: वो बिजनेसमैन जिसका गरीबी में कटा बचपन,फिर कट गए हाथ, बावजूद बनाया लाखों का कारोबार

New Delhi:  कहते हैं अगर सच्चे दिल से आप किसी चीज को चाहो तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने में लग जाती है।  सफलता की कुछ कहानियां ऐसी होती है, जिन पर विश्वास करना मुश्किल होता है। ऐसी ही एक कहानी है, मूदबिदरी-कर्कला की जानी-मानी फर्म जीके डेकोरेटर्स के मालिक गणेश कामथ की।  गणेश के दोनों हाथ नहीं है और उसके बाद भी उन्होंने इसे कमजोरी बनाने के बजाय अपनी  ताकत बना ली, और वो कर दिखाया जो वाकई काबिलेतारीफ है। गणेश कामथ वो बिजनेसमैन हैं, जिनकी कहानी अगर आपने सुन ली तो आपको समझ आ जाएगा कि जिंदगी में कोई भी चीज असंभव नहीं है। 

गणेश कर्नाटक के कर्कला में जीके डेकोरटर्स नाम की एक फर्म चलाते हैं, जो कि पूरे क्षेत्र में काफी मशहूर है। लेकिन गणेश कामथ के यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। गणेश ने 2001 में लाइट का काम करते करंट की वजह से अपने हाथ खो दिए थे और आज वो सफल आंत्रप्रेन्योर में से एक हैं।  उन्होंने कैटरिंग के बिजनेस से अपना कारोबार शुरू किया था और अब वो मेगा इवेंट्स का आयोजन करते हैं।

गणेश का पूरा बचपन गरीबी में बीता। 7वीं क्लास तक पढ़ाई की, लेकिन पैसों की कमी की वजह से आगे पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। उन्होंने इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रेक्टर के रूप में काम शुरू कर दिया था। बात 2001 की है जब कार्कला में एक आयोजन के दौरान गणेश के बॉस ने उसे एक फ्लड लाइट पर एक लाइट बल्ब ठीक करने के लिए 29 फीट ऊंचे मचान पर चढ़ने को कहा। जब वे लाइट्स कनेक्ट कर रहे थे, तभी वह नीचे जा गिरे। उसके बाद उन्हें सीधे अस्पताल में होश आया। जब तक गणेश होश में आए तब तक वह अपने दोनों हाथ खो चुके थे। गणेश के हाथ सीधे तार के संपर्क में आ गए थे जो कि पास के पोल से लगे थे और उसे करंट लग गया। उनके साथियों ने उन्हें करंट से बचाया लेकिन उनके दोनों हाथ खराब हो चुके थे।

भविष्य में कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाले गणेश दोनों हाथ खोने के बाद डिप्रेशन में चले गए थे।  गणेश कामथ को उनकी फर्म से निकाल दिया गया। वही फर्म जिसके लिए गणेश ने 13 साल तक काम किया था। आज उसी फर्म के लिए गणेश कामथ किसी काम के नहीं थे। गणेश उस वक्त इतना परेशान हो गए थे कि उन्होंने जिंदगी खत्म करने की ठान ली थी। लेकिन जब किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। गणेश के मन में जिंदगी जीने का जोश उनके एक रिश्तेदार ने भरा।

उस रिश्तेदार ने गणेश कामथ से कहा कि उसने गणेश के चेहरे पर ‘राजयोग’ देखा है। गणेश बताते हैं कि, ‘भले ही उनका मकसद मुझे खुश करने का था, लेकिन उस वक्त मैं अपनी जिंदगी से इतना निराश था कि उनके ये शब्द मेरे लिए उम्मीद की एक किरण बन गए थे। गणेश को एक्सीडेंटल बीमा से जो पैसा मिला, उससे उन्होंने काम शुरू किया था। उन्होंने दो म्यूजिक सिस्टम्स खरीदे और उन्हें शादी और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में किराए से देना शुरू कर दिया। जिससे शुरुआत में वो एक दिन के 350 रुपए कमा लेते थे, लेकिन आज उनकी फर्म जीके डेकोरेटर्स का टर्न ओवर लाखों में है। गणेश कामथ की सफलता बड़ी सीख है। स जीके डेकोरेटर्स पिछले 16 सालों से शादियों और आयोजनों में अपनी सेवाएं दे रहा है। वर्तमान समय में इस फर्म में आज 40 लोग काम करते हैं। गणेश कहते हैं, आज भले ही मैं खुद अपने हाथ से खाना नहीं खा पाता हूं लेकिन मेरा वेंचर 40 लोगों और उनके परिवार का पेट भर रहा है।

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