मेरे जज्बातों से इस कदर वाकिफ है मेरी कलम, मैं इश्क भी लिखना चाहूं तो ‘इन्कलाब’ लिखा जाता है

New Delhi:  इंकलाब का गीत सुनाकर गोरों का द’म तोड़ा, रंग दे बसन्ती चोला जिन्होंने देश की ख़ातिर ओढ़ा। चूम के फां’सी का फ’न्दा लिख गए जो अमर कहानी, अमर रहे …

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जलियांवालाबाग ह’त्याकां’ड के निशां देख फूट-फूटकर रोए थे भगत सिंह,वहां की मिट्टी लेकर घर लौटे थे

New Delhi:   लाहौर जेल में कैद भगत सिंह को एक चिट्ठी मिली थी। लिखा था- हमने अपने भागने के लिए एक रास्ता बनाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि हमारी …

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