मुझे मेरी बेटी पर गर्व है, ये शब्द उस पिता के हैं जिसकी बेटी बनी आदर्श, कहानी दिल को छू जाए

New Delhi:  बेटों से कम नहीं होती हैं बेटियां। बहुत खुशनसीब होते हैं वो जिनके घर पर होती हैं बेटियां। एक पिता ने भी कुछ ऐसी ही लाइन बोली थी, कहा था-  मुझे मेरी बेटी पर गर्व है…ये शब्द उस पिता के हैं जिसकी बेटी गांव के लिए एक आदर्श बनकर उभरी थीं। ये एक ऐसी कहानी है जो आपके दिल को छू लेगी। पिता का कहना है कि बेटियां एक तरफ मां के घर के काम में हाथ बटाती है तो वहीं दूसरी तरफ पिता के लिए भी कुछ कर दिखाती है। ये सिर्फ एक बेटी ही कर सकती है। 

पिता ने बताया कि सरकारी स्कूलों में टीचर की कमी थी। सारे पोस्ट खाली थे। बच्चों की पढ़ाई को भी नुकसान हो रहा था।  वहीं खाटूश्यामजी में सरकारी स्कूल में गांव की ये बेटी ने बिल्कुल फ्री शिक्षा दी। राज्य सरकार ने खाटूश्यामजी की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को आदर्श घोषित किया। स्कूल में रसायन व विज्ञान के टीचरों के अलावा कई पद खाली थे। रसायन विज्ञान से एमएससी नीतू शर्मा खुद ही बच्चों को पढ़ाने में जुट गई।

नीतू ने क्लास 11वीं और 12 वीं के स्टूडेंट को मुफ्त में पढ़ाया।  वहीं स्टूडेंट भी इनकी पढ़ाने के तरीसे से काफी खुश थे।  नीतू शर्मा ने बताया कि उनके पिता श्याम सुंदर शर्मा भी इसी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। नीतू ने कहा कि व्यक्ति के पास पैसे, विचार और शिक्षा है तो उसका अवश्य दान करना चाहिए। नीतू के इन विचारों और शिक्षा से उनके पिता श्याम सुंदर शर्मा ही नहीं बल्कि पूरा स्कूल नीतू पर गर्व कर रहा है।

प्रधानाचार्य शर्मा ने कहा कि मुझे मेरी बेटी पर गर्व तो है ही साथ ही अन्य बेटियों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने बताया था कि स्कूल में एक केमेस्ट्री, एक गणित, प्रथम लेवल एवं द्वितीय लेवल का एक पद तथा एलडीसी और चतुर्थ श्रेणी का पद खाली है और इन पदों को भरवाने का हर संभव प्रयास करूंगा। वैसे तो यह मामला 2 साल पुराना है, लेकिन प्रेरणा देने के लिए नीतू की कहानी ही काफी है।

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